विश्व फोटोग्राफी दिवस 2026 के अवसर पर दृश्य कला संकाय के व्यावहारिक कला (अप्लाइड आर्ट्स) विभाग द्वारा अहिवासी आर्ट गैलरी में "थ्रू द लेंस" (THROUGH THE LENS) शीर्षक से एक भव्य और व्यापक राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी एवं रचनात्मक संगोष्ठी का समापन हुआ।
इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि कुलसचिव (रजिस्ट्रार) श्री राजन श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि प्रख्यात फोटोग्राफर श्री अमिताभ अग्रवाल द्वारा किया गया। प्रदर्शनी ने युवा कलाकारों और फोटोग्राफरों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करने के लिए कला प्रेमियों, विद्वानों और छात्रों की भारी भीड़ को आकर्षित किया।
कुलसचिव ने अपने संबोधन में कहा कि यह प्रदर्शनी कला की एक गहरी और परिपक्व समझ को दर्शाती है। प्रदर्शित कृतियाँ असाधारण गुणवत्ता की हैं, जो भारत के विविध पहलुओं के साथ-साथ बनारस की लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रूप से समेटे हुए हैं। उन्होंने छात्रों और पेशेवरों दोनों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।प्रदर्शनी के लिए देशभर से 250 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं। इनमें से जूरी द्वारा 139 प्रविष्टियों का सूक्ष्मता से चयन किया गया, और 64 बड़े प्रिंट विशेष रूप से तैयार करके दीर्घा में प्रदर्शन के लिए लगाए गए।
श्री अमिताभ अग्रवाल ने फोटोग्राफी के तकनीकी पहलुओं, आलोचनात्मक मूल्यांकन और रचनात्मकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि फोटोग्राफी केवल एक शौक नहीं है, बल्कि यह विज्ञान और कला का एक कठिन और गंभीर संगम है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
विश्व फोटोग्राफी दिवस की गतिविधियों के तहत विभाग द्वारा एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया गया। इस सत्र में नगर के प्रख्यात साहित्यकार एवं नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री श्री व्योमेश शुक्ल उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, "फोटोग्राफी जीवन के दुखों और कहानियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और बताने की कला है। एक अच्छी तस्वीर केवल एक दृश्य नहीं दिखाती; यह उसके पीछे छिपी पूरी कहानी, भावनाओं और जीवन के आंतरिक द्वंद्वों को भी सामने लाती है।" श्री व्योमेश शुक्ल ने प्रदर्शित तस्वीरों का साहित्यिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया और छात्रों के साथ संवाद किया।
वरिष्ठ पत्रकार और फोटोग्राफर श्री अमिताभ अग्रवाल ने छात्रों से बातचीत करते हुए फोटोग्राफी के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को बताया कि आज फोटोग्राफी केवल कैमरे से तस्वीरें खींचने तक सीमित नहीं रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मिररलेस कैमरे, डिजिटल प्रोसेसिंग और आधुनिक फोटोग्राफी सॉफ्टवेयर ने इसके दायरे और संभावनाओं का काफी विस्तार किया है। इन बदलावों के बावजूद, उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी की मूलभूत भाषा और व्याकरण आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
विभाग के पूर्व छात्र एवं वरिष्ठ फोटोग्राफर श्री मनीष खत्री ने छात्रों को "कैमरे के लेंस से बनारस को देखने" के विभिन्न आयामों से परिचित कराया। उन्होंने फोटोग्राफी के माध्यम से बनारस की गलियों, घाटों, बाजारों, लोगों के हाव-भाव, स्थानीय जीवन, कामकाज के तरीकों, बाहर से आने वाले पर्यटकों की प्रतिक्रियाओं और शहर की दिनचर्या को दर्ज (दस्तावेजीकरण) करने की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
व्यावहारिक कला विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा ने छात्रों को संबोधित किया और फोटोग्राफी को भारतीय आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक फोटोग्राफर को अपनी फोटोग्राफिक दृष्टि (क्रिएटिव विज़न) की तुलना बाबा भोलेनाथ के तीसरे नेत्र से करनी चाहिए।
दुनिया भर में हर साल 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विभाग के 100 से अधिक छात्रों ने भाग लिया और तीनों विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्याख्यानों एवं इंटरैक्टिव सत्रों का लाभ उठाया।